बारिश और खराब मौसम की वजह से कुछ देर के लिए रुकी अमरनाथ यात्रा बालटाल बेस कैंप से फिर शुरू हो गई। तीर्थयात्रियों का पहला बड़ा जत्था "बम बम भोले" के जयकारे लगाते हुए पूरी श्रद्धा के साथ पवित्र गुफा की ओर बढ़ चला। अधिकारियों ने बताया कि 10 हजार से ज्यादा तीर्थयात्री प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग के दर्शन के लिए बालटाल से आगे बढ़ेंगे और आज शाम तक बेस कैंप लौट आएंगे।
बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आगे बढ़े तीर्थयात्री
हाल के खराब मौसम और मुश्किल रास्तों के बावजूद, न तो मौसम की मार और न ही बालटाल का 16 किलोमीटर लंबा कठिन रास्ता तीर्थयात्रियों के जोश को कम कर पाया। कई यात्रियों ने रास्ते में पूजा-अर्चना करते और रस्में निभाते हुए एक नए उत्साह का अनुभव किया, क्योंकि वे "बाबा बर्फानी" के दर्शन करने के लिए आगे बढ़ रहे थे।
पूरे रास्ते पर रखी जा रही है कड़ी निगरानी
सुबह-सुबह यात्रा शुरू करने वाले एक तीर्थयात्री ने कहा, "हर पड़ाव पर हमें जयकारे और प्रार्थनाएं सुनाई दे रही थीं; लोगों का जोश कम नहीं हुआ है।" यात्रा अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा और यात्रियों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने के लिए पूरे रास्ते पर कड़ी निगरानी रखी।
तीर्थयात्रियों को करनी होगी 42 किलोमीटर लंबी यात्रा
साथ ही, अधिकारियों ने लगभग 10 हजार तीर्थयात्रियों को पारंपरिक पहलगाम रास्ते से जाने की अनुमति दी है। अधिकारियों ने बताया कि पहलगाम से जाने वाले तीर्थयात्रियों को लगभग 42 किलोमीटर लंबी यात्रा करनी होगी और उम्मीद है कि वे एक-दो दिन में अपनी यात्रा पूरी करके पहलगाम लौट आएंगे।
मेडिकल टीम, इमरजेंसी शेल्टर और बचाव दल भी हैं तैयार
श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मौसम के पूर्वानुमान और रास्ते की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। मौसम या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए मेडिकल टीमें, इमरजेंसी शेल्टर और बचाव दल जैसी आपातकालीन व्यवस्थाएं तैयार रखी गई हैं।
शारीरिक चुनौतियों और आध्यात्मिक श्रद्धा का संगम है अमरनाथ यात्रा
कश्मीर में गर्मियों के मौसम की यह सालाना यात्रा शारीरिक चुनौतियों और गहरी आध्यात्मिक श्रद्धा का संगम है। इस साल तीर्थयात्रियों की ज्यादा संख्या मुश्किल हालात के बावजूद पवित्र दर्शन करने के प्रति भक्तों के दृढ़ संकल्प को दिखाती है।
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